॥ ॐ नमो नारायणाय ॥   ·   ॐ नमो वेंकटेशाय   ·   जय श्री बालाजी नरसिंह
श्री बालाजी नरसिंह मंदिर, बहियारा — दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली
दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली · बहियारा धाम

बिहार की भूमि पर दक्षिण भारत की दिव्य आराधना

भोजपुर की पुण्य भूमि पर, सोन नदी के रमणीय तट पर स्थित — सनातन संस्कृति का जाग्रत केंद्र

🪔 दर्शन: प्रातः ७:३० – ११:३०  ·  विश्राम: ११:३० – ४:३०  ·  सायं: ४:३० – ८:०० बजे 🪔
परिचय

श्री बालाजी नरसिंह मंदिर के विषय में

भोजपुर की पुण्य भूमि पर, जीवनदायिनी सोन नदी के रमणीय व शांत तट पर स्थित श्री बालाजी नरसिंह मंदिर सनातन संस्कृति का एक जाग्रत केंद्र है। इस भव्य और अलौकिक मंदिर की स्थापना परमपूज्य ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव श्री महामानव महामृत्युंजय जी की पावन प्रेरणा एवं असीम कृपा से संपन्न हुई है।

इस देवालय की प्राण-प्रतिष्ठा एवं सुप्रतिष्ठा १२ अप्रैल २०२६ (वैशाख कृष्ण पक्ष दशमी, रविवार) को पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न हुई।

इस मंदिर का ढांचा और प्रांगण पूर्णतः पारंपरिक दक्षिण भारतीय द्रविड़ स्थापत्य शैली पर आधारित है। कला और धर्म का ऐसा सूक्ष्म संयोजन उत्तर भारत में अत्यंत दुर्लभ है।

"संकल्प है कि यह पवित्र मंदिर युगों-युगों तक समस्त मानव जाति के लिए धर्म, अटूट भक्ति और सेवा का एक अप्रतिम केंद्र बना रहे।"
श्री बालाजी नरसिंह मंदिर का गोपुरम् — बहुरंगी मूर्तिकला गरुड़ प्रतिमा — महाबलीपुरम के शिल्पकारों द्वारा निर्मित
दिव्य विग्रह

परिसर के आध्यात्मिक आकर्षण

श्री गणपति भगवान

श्री गणपति

विघ्नहर्ता — महाबलीपुरम के शिल्पकारों द्वारा

गरुड़ प्रतिमा

गरुड़ एवं हनुमान

संकटमोचन महावीर हनुमान का भव्य उपासना स्थल

मुख्य विग्रहों का निर्माण देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार श्री अरुण योगीराज (मैसूर) द्वारा किया गया है — वही विख्यात शिल्पी जिन्होंने अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर में विराजित 'रामलला' की अनुपम मूर्ति को तराशा है।

दैनिक पूजन एवं अनुष्ठान

दर्शन समय सारणी

समयअनुष्ठान एवं सेवा
प्रातः ०७:३० बजेश्री बालाजी का दिव्यरूप दर्शन
प्रातः ०८:३० बजेप्रातःकालीन आराधना पूजा
प्रातः ०९:०० बजेमंगला आरती / भोग आरती
प्रातः ११:३० बजेमध्यान्ह पूजा और पट बंद
प्रातः ११:३० – अपराह्न ०४:३०मंदिर के पट बंद (विश्राम काल)
अपराह्न ०४:३० बजेमंदिर पट खुला और आम दर्शन
सायं ०५:३० बजेसायंकालीन आराधना
सायं ०६:३० बजेसंध्या आरती / भोग आरती
सायं ०८:०० बजेशयन आरती एवं पट बंद

प्रतिदिन संध्याकाल में आसपास के सैकड़ों गांवों की मातृशक्ति द्वारा सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
मंदिर में तिरुमला तिरुपति धाम की तर्ज पर दक्षिण भारत से आए विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सेवा संपन्न होती है।

विशेष पूजा सेवाएं

सेवा एवं दक्षिणा

सामान्य अर्चना
₹ ११/-
मंदिर दर्शन समय के दौरान
विशेष अर्चना
₹ १०१/-
१०८ मंत्रोच्चार सहित
सहस्रनाम अर्चना
₹ ५०१/-
१००८ मंत्रोच्चार · प्रातः ८–११ बजे
पूर्व पंजीकरण आवश्यक
श्री बालाजी अभिषेकम्
₹ ५,००१/-
प्रातः ६–८ बजे
पूर्व अनुमति व बुकिंग आवश्यक
महालक्ष्मी पूजन
₹ १,००१/-
केवल शुक्रवार · प्रातः ९–११ बजे
पूर्व पंजीकरण आवश्यक
वाहन पूजन
₹ ३०१ – ५०१/-
दोपहिया ₹३०१ · चार पहिया ₹५०१
प्रतिदिन ८–१२ एवं ४–६ बजे
स्थापत्य एवं वास्तुकला

दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली

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गोपुरम्

मंदिर का प्रवेश द्वार बहुरंगी मूर्तिकला से सुसज्जित है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं का मन मोह लेता है।

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शिल्प एवं नक्काशी

अलंकृत स्तंभों पर सूक्ष्म नक्काशी तथा छत पर भगवान विष्णु के दशावतारों की कलात्मक गाथाएं।

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आगम शास्त्र

चेन्नई की विशेषज्ञ शिल्पकार टीम ने मात्र ११ महीनों के रिकॉर्ड समय में निर्माण पूर्ण किया।

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काष्ठकला

विशाल द्वारों पर लकड़ी की पारंपरिक नक्काशी दक्षिण भारत के अनुभवी काष्ठ-शिल्पियों द्वारा संपन्न।

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यज्ञ मंडप

दक्षिण भारतीय वैदिक पद्धति के अनुसार यज्ञ-हवन संपन्न कराने हेतु विशेष मंडप।

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कमल सरोवर एवं नवग्रह उद्यान

ध्यान हेतु पवित्र पुष्करणी तथा ग्रह-शांति एवं पर्यावरण संरक्षण को समर्पित दिव्य उद्यान।

श्रद्धा एवं समर्पण

संस्थापक परिवार

पारिवारिक श्रद्धांजलि एवं सेवा

अपने पूज्य माता-पिता श्री रवीन्द्र किशोर सिन्हा जी (श्री आर.के. सिन्हा) एवं श्रीमती रीता किशोर सिन्हा जी के स्नेह-आशीर्वाद से, उनके सुपुत्र एवं पुत्रवधू श्री ऋतुराज सिन्हा एवं श्रीमती पल्लवी सिन्हा द्वारा इस दिव्य मंदिर का निर्माण श्रद्धापूर्वक कराया गया है।

अपने परदादा स्वर्गीय श्री यज्ञानन्द लाल तथा परदादी स्वर्गीय श्रीमती रामानन्दी देवी की पावन स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए, परिवार के पैतृक गांव बहियारा स्थित विद्यालय के प्रांगण में इस मंदिर को निर्मित किया गया है।

श्री रवीन्द्र किशोर सिन्हा श्रीमती रीता किशोर सिन्हा श्री ऋतुराज सिन्हा श्रीमती पल्लवी सिन्हा

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दर्शनार्थियों हेतु

महत्वपूर्ण नियम एवं निर्देश

विशेष पूजा, अभिषेक एवं सहस्रनाम अर्चना हेतु पूर्व पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

श्रद्धालु निर्धारित समय से कम से कम १५ मिनट पूर्व मंदिर परिसर में उपस्थित हों।

अभिषेकम् एवं विशेष पूजन के लिए आवश्यक सामग्री मंदिर द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक कि अन्यथा निर्देशित न किया जाए।

पूजा प्रारम्भ होने के पश्चात अनुष्ठान में व्यवधान स्वीकार्य नहीं होगा।

मंदिर परिसर में शालीन एवं मर्यादित वस्त्र धारण करना अपेक्षित है।

मंदिर परिसर में स्वच्छता, शांति एवं धार्मिक मर्यादा बनाए रखना सभी श्रद्धालुओं का कर्तव्य है।

विशेष परिस्थितियों में मंदिर प्रशासन समय एवं नियमों में परिवर्तन करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

संपर्क

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📍 स्थान

श्री बालाजी नरसिंह मंदिर
बहियारा, भोजपुर (आरा)
बिहार, भारत

सोन नदी के पावन तट पर

📞 पूजा बुकिंग एवं जानकारी

विशेष पूजा, अभिषेकम् अथवा अन्य सेवाओं के संबंध में अधिक जानकारी हेतु मंदिर प्रशासन से संपर्क करें।

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